पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ममता बनर्जी के नौ मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा है। ममता बनर्जी 2011 से यहां की मुख्यमंत्री थीं और उनके खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी नजर आ रही थी। इससे निपटने के लिए उन्होंने भरपूर जतन किए, लेकिन कुछ काम नहीं आया। ममता सरकार में मंत्री रहे नौ नेताओं को इस बार हार का सामना करना पड़ा है। पश्चिम बंगाल में दोनों चरणों में 90 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ था और राज्य में सर्वाधिक मतदान के सभी रिकॉर्ड टूट गए थे।
बीजेपी ने मतदान के बाद जीत का दावा किया था और कहा था कि लोगों ने टीएमसी के विरोध में बंपर मतदान किया। वहीं, टीएमसी ने कहा कि वोट कटने के डर से लोग घरों से बाहर निकले और वोट डाला। हालांकि, जब नतीजे सामने आए तो साफ हो गया कि यह एंटी इनकंबेंसी ही थी, जिसके कारण बंगाल में रिकॉर्ड मतदान हुआ।
ममता के इन मंत्रियों को मिली हार
- महिला और बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा श्याम पुकुर विधानसभा से हार गईं।
- लाइब्रेरी मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी मंतेश्वर से हार गए।
- नॉर्थ बंगाल डेवलपमेंट मंत्री उदयन गुहा दिनहाटा विधानसभा क्षेत्र से हार गए।
- फाइनेंस राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य दमदम नॉर्थ से हार गए।
- एजुकेशन मंत्री ब्रत्य बसु दमदम से हार गए।
- फूड मिनिस्टर रथिन घोष मध्यमग्राम से हार गए।
- फायर और इमरजेंसी सर्विस मिनिस्टर सुजीत बसु बिधाननगर विधानसभा क्षेत्र से हार गए।
- पंचायत और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री बेचाराम मन्ना सिंगुर से हार गए।
- फॉरेस्ट मिनिस्टर बिरबाहा हंसदा बिनपुर विधानसभा क्षेत्र से हार गए।
बीजेपी को 200 से ज्यादा सीटें
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी 137 सीटें जीत चुकी है और 71 सीटों पर आगे चल रही है। चुनाव आयोग के आंकड़े के अनुसार बीजेपी के खाते में कुल 208 सीटें जाती दिख रही हैं। वहीं, ममता बनर्जी की टीएमसी महज 79 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। कांग्रेस को दो सीटों पर जीत मिली है और मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था। वह दोनों सीटें जीत गए हैं। अब उन्हें किसी एक सीट को छोड़ना होगा।
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